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Monday, 1 June 2020

16:14

आज का पंचांग 02 जून 2020 चित्रा नक्षत्र व्यतिपात योग

दिनांक : 02 जून 2020

आज का पंचांग 02 जून 2020 चित्रा नक्षत्र व्यतिपात योग

आज का पंचांग   


सूर्योदय का समय : प्रातः 05:23

सूर्यास्त का समय : सायं 07:15

 

चंद्रोदय का समय : दोपहर 03:33

चंद्रास्त का समय : रात्रि 03:26


तिथि संवत :-

दिनांक - 02 जून 2020

मास - ज्येष्ठ

पक्ष - शुक्ल पक्ष

तिथि - एकादशी मंगलवार दोपहर 12:04 तक रहेगी

अयन -  सूर्य उत्तरायण

ऋतु -  ग्रीष्म ऋतु

विक्रम संवत - 2077

शाके संवत - 1942

हिजरी सन - 1441

मुस्लिम माह - शव्वाल तारीख 09

Sunday, 31 May 2020

16:13

आज का पंचांग 01 जून 2020 हस्त नक्षत्र सिद्धि योग

दिनांक : 01 जून 2020

आज का पंचांग 01 जून 2020 हस्त नक्षत्र सिद्धि योग

आज का पंचांग   


सूर्योदय का समय : प्रातः 05:24

सूर्यास्त का समय : सायं 07:15

 

चंद्रोदय का समय : दोपहर 02:28

चंद्रास्त का समय : रात्रि 02:48


तिथि संवत :-

दिनांक - 01 जून 2020 

मास - ज्येष्ठ

पक्ष - शुक्ल पक्ष

तिथि - दशमी सोमवार दोपहर 02:57 तक रहेगी

अयन -  सूर्य उत्तरायण

ऋतु -  ग्रीष्म ऋतु

विक्रम संवत - 2077

शाके संवत - 1942

हिजरी सन - 1441

मुस्लिम माह - शव्वाल तारीख 08

Saturday, 30 May 2020

16:47

आज का पंचांग 31 मई 2020 उत्तराफ़ाल्गुनी नक्षत्र वज्र योग

दिनांक : 31 मई 2020 

आज का पंचांग 31 मई 2020 उत्तराफ़ाल्गुनी नक्षत्र वज्र योग

आज का पंचांग   


सूर्योदय का समय : प्रातः 05:24

सूर्यास्त का समय : सायं 07:14

 

चंद्रोदय का समय : दोपहर 01:24

चंद्रास्त का समय : रात्रि 02:11 (01 जून)


तिथि संवत :-

दिनांक - 31 मई 2020

मास - ज्येष्ठ

पक्ष - शुक्ल पक्ष

तिथि - नवमी रविवार सायं 05:36 तक रहेगी

अयन -  सूर्य उत्तरायण

ऋतु -  ग्रीष्म ऋतु

विक्रम संवत - 2077

शाके संवत - 1942

हिजरी सन - 1441

मुस्लिम माह - शव्वाल तारिक 07

सूर्यादय कालीन नक्षत्र  :-

नक्षत्र - उत्तराफ़ाल्गुनी नक्षत्र रात्रि 03:01 तक रहेगा इसके बाद हस्त नक्षत्र रहेगा

योग - वज्र योग सायं 04:31 तक रहेगा इसके बाद सिद्धि  योग रहेगा

करण - बालव करण प्रातः 06:49 तक रहेगा इसके बाद कौलव करण रहेगा

ग्रह विचार :-

सूर्यग्रह - वृष

चंद्रग्रह - सिंह

मंगलग्रह - कुंभ

बुधग्रह - मिथुन

गुरूग्रह - मकर

शुक्रग्रह - वृष

शनिग्रह - मकर

राहु - मिथुन

केतु - धनुराशि में स्थित है

राहुकाल (मध्यम मान के अनुसार ) :-

सायं 04:30  से 06:00 तक  रहेगा

अभिजित मुहूर्त :-

प्रातः 11:51  से 12:47  तक  रहेगा

विजय मुहूर्त :-

दोपहर 02:37  से 03:33 तक  रहेगा

गोधूलि मुहूर्त :-

सायं 07:00  से 07:24 तक  रहेगा

निशिता मुहूर्त :-

रात्रि 11:59  से 12:39 तक  रहेगा

ब्रह्म मुहूर्त :-

प्रातः 04:02 (01 जून)  से 04:43 तक  रहेगा

दिशाशूल :-

पश्चिम दिशा की तरफ रहेगा यदि जरुरी हो तो चॉकलेट खाकर यात्रा कर सकते है

चौघड़िया मुहूर्त :-

दिन का चौघड़िया

प्रातः 05:24 से 07:08 तक उद्वेग का

प्रातः 07:08 से 08:51 तक चर का

प्रातः 08:51 से 10:35 तक लाभ का

प्रातः 10:35 से 12:19 तक अमृत का

दोपहर 12:19 से 02:03 तक काल का

दोपहर 02:03 से 03:47 तक शुभ का

दोपहर बाद 03:47 से 05:30 तक रोग का

सायं 05:30 से 07:14 तक उद्वेग का चौघड़िया  रहेगा

रात का चौघड़िया

सायं 07:14 से 08:30 तक शुभ का

रात्रि 08:30 से 09:47 तक अमृत का

रात्रि 09:47 से 11:03 तक चर का

रात्रि 11:03 से 12:19 तक रोग का

अधोरात्रि 12:19 से 01:35 तक काल का

रात्रि 01:35 से 02:51 तक लाभ का

प्रातः (कल) 02:51 से 04:07 तक उद्वेग का

प्रातः (कल) 04:07 से 05:24 तक शुभ का चौघड़िया रहेगा

आज जन्मे बच्चों का नामाक्षर :-  


समय             पाया               राशि              जन्माक्षर


05:37            रजत                  सिंह                  टे


10:19            रजत                  कन्या                    टो


15:55              रजत                 कन्या                 प


21:28              रजत               कन्या                  पी


03:01              रजत              कन्या                  पू


आज विशेष :-

आज वज्र योग में कंबल का दान करना शुभ फलदायी होता है आज उपवास करके ब्राह्मणी नाम की श्वेतवर्णा पार्वती का भक्ति सहित पूजन करें और बाह्मण तथा बाह्मण की कन्या को दूध मिले हुए भात का भोजन कराकर रात्रि में स्वयं भोजन करें तो समस्त मनोकामनाएं पूरी होती है

* रविवार व्रत की कथा :-

पूजा विधि :-

सर्व मनोकानाओ की पूर्ति हेतु रविवार का व्रत श्रेष्ठ है । इस व्रत की विधि इस प्रकार है  प्रातः काल स्नान आदि से निवृत हो स्वच्छ वस्त्र धारण करे। शान्तचित्त होकर परमात्मा का स्मारण करे ! भोजन तथा फलाहार सूर्य के प्रकाश रहते ही कर लेना उचित है । यदि निराहार रहने पर सूर्य छिप जाए तो दूसरे दिन सूर्य उदय होने पर अर्घ्य देने के बाद ही भोजन करे । व्रत के दिन नमकीन तेलयुत्त भोजन कदापि ना करे इस व्रत को करने से मान-सम्मान बढ़ता है तथा शत्रुओ का क्षय होता है आँख की पीड़ा के अतिरित्त अन्य सब पीड़ाये दूर होती है।

कथा प्रारंम्भ :-

एक बुढिया थी । उसका नियम था प्रति रविवार को सवेरे सवेरे ही स्नान आदि कर घर को गौ के गोबर से लीपकर फिर भोजन तैयार कर भगवान को भोग लगा कर स्वयं भोजन करती थी। ऐसा व्रत करने से उसका घर अनेक प्रकार के धन धान्य से पूर्ण था । श्री हरि की कृपा से घर में किसी प्रकार का विघ्न या दु:ख नही था । सब प्रकार से घर मे आनन्द रहता था । 

इस तरह कुछ दिन बीत जाने पर उसकी एक पड़ोसन जिसकी गौ का गोबर वह बुढ़िया लाया करती थी। विचार करने लगी कि यह वृद्धा सर्वदा मेरी गौ का गोबर ले जाती है । इसलिए अपनी गौ को घर के भीतर बांधने लगी। बुढ़िया को गोबर ना मिलने से रविवार के दिन अपने घर को न लीप सकी। इसलिए उसने न तो भोजन बनाया न भगवान को भोग लगाया तथा स्वयं भी भोजन नही किया। 

इस प्रकार उसने निराहार व्रत किया । रात्रि हो गई और वह भूखी सो गई । रात्रि मे भगवान ने उसे स्वप्न दिया और भोजन न बनाने तथा लगाने का कारण पूछा । वृद्धा ने गोबर न मिलने का कारण सुनाया तब भगवान ने कहा कि माता हम तुमको ऐसी गो देते है जिससे सभी इच्छाएं पूर्ण होती है क्योकि तुम हमेशा रविवार को गौ के गोबर से घर को लीपकर भोजन बनाकर मेरा भोग लगाकर खुद भोजन करती हो । इससे मै खुश होकर तमको वरदान देता हूँ। 

निर्धन को धन और बाँझ स्त्रियों को पुत्र देकर दुःखो को दूर करता हूँ तथा अन्त समय मे मोक्ष देता हूँ। स्वप्न मे ऐसा वरदान देकर भगवान तो अन्तर्धान हो गए और वृद्धा को आँख खुली तो वह देखती है कि आंगन में एक अति सुन्दर गौ और बछड़ा बंधे हुए है । वह गाय और बछड़े को देखकर अतीव प्रसन्न हुई और उसको घर के बाहर बांध दिया और वही खाने को चारा डाल दिया। 

जब उसकी पड़ोसन ने बुढ़िया के घर के बाहर एक अति सुन्दर गौ और बछड़ा देखा तो द्वेष के कारण उसका हृदय जल उठा और उसने देखा कि गाय ने सोने का गोबर किया है तो वह उस गाय का गोबर ले गई और अपनी गाय का गोबर उसकी जगह पर रख गई। वह नित्यप्रति ऐसा ही करती रही और सीधे - साधे बुढ़िया को इसकी खबर नहीं होने दी तब सर्वव्यापी ईश्वर ने सोचा कि चालाक पड़ोसन के कर्म से बुढ़िया ठगी जा रही है 

तो ईश्वर ने संध्या के समय अपनी माया से बहुत जोर की आंधी चला दी। बुढ़िया ने अन्धेरो के भय से अपनी गौ को अन्दर बांध लिया। प्रातः काल जब बुढ़िया ने देखा कि गौ ने सोने का गोबर दिया है तो उसके आश्र्चय की सीमा नही रही और वह प्रतिदिन गऊ को घर के भीतर बांधने लगी। उधर पड़ोसन ने देखा की बुढ़िया गऊ को घर के भीतर बांधने लगी है और उसका सोने का गोबर उठाने का दाँव नहीं चलता तो वह ईर्ष्या और डाह से जल उठी और कुछ उपाय न देख पड़ोसन ने उस देश के राजा की सभा मे जाकर कहा महाराज मेरे पड़ोस मे एक वृद्धा के पास ऐसो गउ है 

जो आप जैसे राजाओं के ही योग्य है. वह नित्य सोने का गोबर देती है आप उस सोने से प्रजा का पालन करिए। वह वृद्धा इतने सोने का क्या करेगी । राजा ने यह बात सुन अपने दूतों को वृद्धा के घर से गऊ लाने की आज्ञा दी। वृद्धा प्रातः ईश्वर का भोग लगा भोजन ग्रहण करने ही जा रही थी कि राजा के कर्मचारियो ने गऊ खोल कर ले गए। वृद्धा काफी रोई - चिल्लाई किन्तु कर्मचारियो के समक्ष कोई क्या कहता । 

उस दिन वृद्धा गऊ के वियोग मे भोजन न खा सकी और रात भर रो-रो ईश्वर से गऊ को पुन: पाने के लिए प्रार्थना करती रही । उधर राजा गऊ को देख कर बहुत प्रसन्न हुआ लेकिन सुबह जैसे ही वह उठा सारा महल गोबर से भरा दिखाई देने लगा । राजा यह देख घबरा गया। भगवान ने रात्रि मे राजा को स्वप्न मे कहा कि हे राजा ! गाय को वृद्धा को लौटाने मे ही तेरा भला है उसके रविवार के व्रत से प्रसन्न होकर मैने उसे गाय दी थी । 

प्रातः होने पर राजा ने वृद्धा को बुलाकर बहुत से धन के साथ सम्मान के सहित गऊ और बछड़ा लौटा दिया। उसकी पड़ोसिन को बुलाकर उचित दण्ड दिया। इतना करने के बाद राजा के महल से गन्दगी दूर हुई । उसी दिन से राजा ने नगरवासियो को आदेश दिया कि राज्य को तथा अपनी समस्त मनोकामनाओ की पूति के लिए रविवार का व्रत करो । व्रत करने से नगर के लोग सुखी जीवन व्यतीत करने लगे । कोई भी बीमारी तथा प्रकृति का प्रकोप उस नगर पर नहीं होता था । सारी प्रजा सुख से रहने लगी                       




नोट :-  दैनिक पंचांग हर सुबह 06:00 बजे से पहले या तक अपडेट किया जाता है

Friday, 29 May 2020

16:20

आज का पंचांग 30 मई 2020 मघा नक्षत्र हर्षण योग

दिनांक : 30 मई 2020

आज का पंचांग 30 मई 2020 मघा नक्षत्र हर्षण योग

आज का पंचांग   


सूर्योदय का समय : प्रातः 05:24

सूर्यास्त का समय : सायं 07:14

 

चंद्रोदय का समय : दोपहर 12:20

चंद्रास्त का समय : रात्रि 01:34


तिथि संवत :-

दिनांक - 30 मई 2020

मास - ज्येष्ठ

पक्ष - शुक्ल पक्ष

तिथि - अष्टमी शनिवार रात्रि 07:57 तक रहेगी

अयन -  सूर्य उत्तरायण

ऋतु -  ग्रीष्म ऋतु

विक्रम संवत - 2077

शाके संवत - 1942

हिजरी सन - 1441

मुस्लिम माह - शव्वाल तारिक 06

Thursday, 28 May 2020

16:41

आज का पंचांग 29 मई 2020 अश्लेषा नक्षत्र व्याघात योग

दिनांक : 29 मई 2020

आज का पंचांग 29 मई 2020 अश्लेषा नक्षत्र व्याघात योग

आज का पंचांग   


सूर्योदय का समय : प्रातः 05:24

सूर्यास्त का समय : सायं 07:13

 

चंद्रोदय का समय : प्रातः 11:16

चंद्रास्त का समय : रात्रि 12:55


तिथि संवत :-

दिनांक - 29 मई 2020

मास - ज्येष्ठ

पक्ष - शुक्ल पक्ष

तिथि - सप्तमी शुक्रवार रात्रि 09:55 तक रहेगी

अयन -  सूर्य उत्तरायण

ऋतु -  ग्रीष्म ऋतु

विक्रम संवत - 2077

शाके संवत - 1942

हिजरी सन - 1441

मुस्लिम माह - शव्वाल तारिक 05

सूर्यादय कालीन नक्षत्र :-

नक्षत्र - अश्लेषा नक्षत्र प्रातः 06:58 तक रहेगा इसके बाद मघा नक्षत्र रहेगा

योग - व्याघात योग रात्रि 10:07 तक रहेगा इसके बाद हर्षण योग रहेगा

करण - गर करण प्रातः 10:44 तक रहेगा इसके बाद वणिज करण रहेगा

ग्रह विचार :-

सूर्यग्रह - वृष

चंद्रग्रह - कर्क

मंगलग्रह - कुंभ

बुधग्रह - मिथुन

गुरूग्रह - मकर

शुक्रग्रह - वृष

शनिग्रह - मकर

राहु - मिथुन

केतु - धनुराशि में स्थित है

राहुकाल (मध्यम मान के अनुसार ) :-

प्रातः 10:30  से 12:00  तक  रहेगा

अभिजित मुहूर्त :-

प्रातः 11:51  से 12:46  तक  रहेगा

विजय मुहूर्त :-

दोपहर 02:37  से 03:32 तक  रहेगा

गोधूलि मुहूर्त :-

सायं 06:59  से 07:23 तक  रहेगा

निशिता मुहूर्त :-

रात्रि 11:58  से 12:39 तक  रहेगा

ब्रह्म मुहूर्त :-

प्रातः 04:03 (30 मई)  से 04:43 तक  रहेगा

दिशाशूल :-

पश्चिम दिशा की तरफ रहेगा यदि जरुरी हो तो चॉकलेट खाकर यात्रा कर सकते है

चौघड़िया मुहूर्त :-

दिन का चौघड़िया

प्रातः 05:24 से 07:08 तक चर का

प्रातः 07:08 से 08:51 तक लाभ का

प्रातः 08:51 से 10:35 तक अमृत का

प्रातः 10:35 से 12:19 तक काल का

दोपहर 12:19 से 02:02 तक शुभ का

दोपहर 02:02 से 03:46 तक रोग का

दोपहर बाद 03:46 से 05:30 तक उद्वेग का

सायं 05:30 से 07:13 तक चर का चौघड़िया  रहेगा

रात का चौघड़िया

सायं 07:13 से 08:29 तक रोग का

रात्रि 08:29 से 09:46 तक काल का

रात्रि 09:46 से 11:02 तक लाभ का

रात्रि 11:02 से 12:19 तक उद्वेग का

अधोरात्रि 12:19 से 01:35 तक शुभ का

रात्रि 01:35 से 02:51 तक अमृत का

प्रातः (कल) 02:51 से 04:08 तक चर का

प्रातः (कल) 04:08 से 05:24 तक रोग का चौघड़िया रहेगा

आज जन्मे बच्चों का नामाक्षर :-  


समय             पाया               राशि              जन्माक्षर


05:37
            रजत                  कर्क                  डो


06:58            रजत                  सिंह                    म


12:47              रजत                 सिंह                 मी


18:34              रजत               सिंह                  मू


24:19              रजत              सिंह                  मे


आज विशेष :-

आज व्याघात योग में वस्त्र दान करना शुभ फलदायी होता है आज अश्लेषा नक्षत्र में सापों का पूजन करने से सर्पभय नही रहता है 

शुक्रवार  व्रत की कथा :-

पूजा विधि :-

इस व्रत को करने वाले कथा के पूर्व कलश को पूर्ण भरेउसके ऊपर गुड़ व चने से भरी कटोरी रखेकथा कहते व सुनते समय हाथ मे भुने चने व गुड़ रखे सुनने वाले सन्तोषी माता की जयइस प्रकार जय-जयकार से बोलते जाएँ। कथा समाप्त होने पर हाथ का गुड़ और चना गौ माता को खिलाएँ । कलश मे रखा हुआ गुड़ व चना सबको प्रसाद के रूप में बाँट दे । कथा समाप्त होने और आरती के बाद कलश के जल को घर में सब जगह छिड़केबचा हुआ जल तुलसी की क्यारी मे डाले। माता भावना की भखी है कम ज्यादा का कोई विचार नहीअतएव जितना भी बन पड़े प्रसाद अर्पण कर श्रद्धा और प्रेम से प्रसन्न मन से व्रत करना चाहिए। 

व्रत के उद्यापन मे अढाई सेर खाजाचने का शाकमोएनदार पूड़ी खीरनैवेद्य रखे। घी का दीपक जला संतोषी माता की जय-जयकार बोल नारियल फोड़े। इस दिन ८ लड़को को भोजन कराए। देवरजेठघर के ही लड़के हो तो दुसरो को बुलाना नही अगर कुटूम्ब मे न मिले तो ब्राह्मणो केरिश्तेदारो के या पड़ोसी के लड़के बुलाए। उन्हें खटाई की कोई वस्तु न दे तथा भोजन करा यथाशक्ति दक्षिणा दे।

कथा प्रारम्भ :-

एक समय की बात है कि एक नगर मै कायस्थब्राह्मण और वैश्य जाति के तीनो लड़को मे परस्पर मित्रता थी। उन तीनोका विवाह हो गया था। ब्राह्मण और कायस्थ के लड़को का गौना भी हो गया थापरन्तु वैय के लड़के का गौना नही हुआ था। एक दिन कायस्थ के लड़के ने कहा- "हे मित्र ! तुम मुकलावा करके अपनी स्त्री को घर क्यो नही लातेस्त्री के बिना घर कैसा बुरा लगता है।" 

यह बात वैश्य के लड़के को जंच गई। वह कहने लगा कि मैं अभी जाकर मुकलावा लेकर आता है। ब्राह्मण के लड़के ने कहा अभी मत जाओ क्योकि शुक्र अस्त हो रहा हैजब उदय हो तब जा कर ले आना। परन्तु वैश्य के लड़के को ऐसी जिद हो गई कि किसी प्रकार से नही माना। जब उसके घरवालो ने सुना तो उन्होने बहुत समझाया परन्तु वह किसी प्रकार से नही माना और अपने ससुराल चला गया। उसको आया देखकर ससुराल वाले भी चकराए। जमाता का स्वागत सत्कार करने के बाद उन्होंने पुछा आपका आना कैसे हुआ 

वैश्य पुत्र कहने लगा कि मैं अपनी पत्नी को विदा कराने के लिए आया है। सुसराल वालो ने भी उसे बहुत समझाया कि इन दिनो शुक्र अस्त हैउदय होने पर ले जानापरन्तु उसने एक न सुनी और अपनी पत्नी को ले जाने का आग्रह करता रहा। जब वह किसी प्रकार न माना तो उन्होने लाचार होकर अपनी पुत्री को विदा कर दिया। वैश्य पुत्र अपनी पत्नी को एक रथ मे बिठा कर अपने घर की ओर चल पड़ा। थोड़ी दूर जाने के बाद मार्ग मे उसके रथ का पहिया टूटकर गिर गया और बैल का पैर टूट गया। उसकी पत्नी भी गिर पड़ी और घायल हो गई। जब आगे चले तो रास्ते मे डाकू मिले। उसके पास जो धनवत्र तथा आभूषण थे वह सब उन्होंने छीन लिए । 

इस प्रकार अनेक कष्टों का सामना कर जब पति पत्नि अपने घर पहुंचे तो आते ही वैश्य के लड़के को सर्प ने काट लियावह मूर्छित होकर गिर पड़ा। तब उसकी स्त्री अत्यन्त विलाप कर रोने लगी। वैश्य ने अपने पुत्र को वैद्यो को दिखलाया तो वैद्य कहने लगे-यह तीन दिन में मृत्यु को प्राप्त हो जाएगा। जब उसके मित्र ब्राह्मण को पता लगा तो उसने कहा- "सनातन धर्म की प्रथा है कि जिस समय शुक्र के अस्त हो कोई अपनी स्त्री को नही लाता। परन्तु यह शुक्र के अस्त के समय स्त्री को विदा कराके ले आया है 

इस कारण सारे विध्न उपस्थित हुए है। यदि यह दोनो सुसराल वापिस चले जाएं और शुक्र के उदय होने पर पुनः आवे तो निश्चय ही विध्न टल सकता है। सेठ ने अपने पुत्र और उसकी स्त्री को शीघ्र ही उसके सुसराल वापिस पहुंचा दिया। वहां पहुंचते ही वैश्य पुत्र की मूर्छा दूर हो गई और साधारण उपचार से ही वह सर्प विष से मुक्त हो गया। अपने दामाद को स्वास्थ्य लाभ करता रहा और जब शुक्र का उदय हुआ तब हर्ष पूर्वक उसकी सुसराल वालो ने उसको अपनी पुत्री के साथ विदा किया। इस के पश्चात् पति पत्नि दोनो घर आकर आनन्द से रहने लगे। इस व्रत के करने से अनेक विघ्न दूर होते है।                              



नोट :-  दैनिक पंचांग हर सुबह 06:00 बजे से पहले या तक अपडेट किया जाता है