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Tuesday, 17 September 2019

03:46

प्रदोष व्रत कथा और सकट व्रत कथा


प्रदोष व्रत कथा और सकट व्रत कथा

* प्रदोष व्रत पूजा विधि :-

सांयकाल के बाद और रात्रि आने से पूर्व का जो समय है उसे प्रदोष कहते है । व्रत करने वाले को उसी समय भगवान् शंकर का पूजन करना चाहिए | प्रदोष व्रत करने वाले को त्रयोदशी के दिन, दिन भर भोजन नहीं करना चाहिए । शाम के समय जब सूर्यास्त में तीन घड़ी का समय शेष रह जाए तब स्नानादि कर्मो से निवृत होकर, श्वेत वस्त्र धारण करके तत्पश्चात् सन्धया- वन्दना करने के बाद शिवजी का पूजन प्रारम्भ करें।

Sunday, 15 September 2019

05:26

नवरात्री व्रत कथा और पूजा की विधि एवं विधान

नवरात्री व्रत कथा और पूजा की विधि एवं विधान

* पूजा की विधि एवं विधान :-

श्री दुर्गा पूजा विशेष रूप से वर्ष में दो बार चैत्र व आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से आरम्भ होकर नवमी तक होती है। देवी दुर्गा के नव(9) स्वरूपों की पूजा होने के कारण 'नवदुर्गा' तथा दिन में पूजा होने से नवरात्र कहा जाता है । चैत्र मास के नवरात्र "वार्षिक नवरात्र" तथा आश्विन मास के नवरात्र "शारदीय नवरात्र" कहलाते है।
04:02

मंगला गौरी व्रत और पूजन विधान एवं उद्यापन विधि


मंगला गौरी व्रत और पूजन विधान एवं उद्यापन विधि

* मंगला गौरी व्रत :-

मंगला गौरी व्रत श्रावण मास में आने वाले सभी मंगलवारों को किया जाता है । इस व्रत में गौरी जी के पूजन का विधान है। चूंकि यह मंगलवार को किया जाता है, इसीलिए इसे 'मंगला गौरी व्रत' कहा जाता है । यह व्रत विशेषतौर पर स्त्रियों द्वारा किया जाता है।

Monday, 9 September 2019

04:01

कजली तीज कथा और करवा चौथ कथा विधि और उघापन

कजली तीज कथा और करवा चौथ कथा विधि और उघापन

* कजली तीज :- (सातूड़ी तीज)

श्रावण मास की तीज को हरियाली तीज का त्यौहार मनाया जाता है। उसी प्रकार से भादों मास के कृष्ण पक्ष की तीज को कजरी तीज का त्यौहार मनाया जाता है । इसे "बूढी तीज" भी कहा जाता है । इस दिन महेश्वरी वैश्य गेहुं, जौ, चने और चावल के सत्त में घी, मेवा डालकर विभिन्न प्रकार के पकवान बनाते है तथा चन्द्रोदय के बाद उसी का भोजन करते है । इसलिए इसे "सातुड़ी तीज" अथवा "सतवा तीज" भी कहा जाता है। इस दिन विशेषतौर पर गाय की पूजा करी जाती है। आटे की सात लोइयां बनाकर उन पर घी, गुड़ रखकर गाय को खिलाने के बाद ही भोजन किया जाता है ।
01:44

होली की कथा और होली - पूजन विधि एवं सामग्री


होली की कथा और होली - पूजन विधि एवं सामग्री

* होली की कथा :-

'बहुत पुरानी बात है- हिरण्यकश्यप नाम का एक राक्षस था । उसके पुत्र का नाम प्रहलाद था । प्रहलाद भगवान् का परम् भक्त था । परन्तु उसका पिता भगवान् को अपना शत्रु मानता था । वह अपने राज्य में किसी को भी ईश्वर का नाम नही लेने देता था। हिरण्यकश्यप ने घोर तपस्या से विपुल शक्ति का संग्रहकर देवताओं को कष्ट देना प्रारंभ किया । इंन्द्रासन पर भी अपना अधिकार कर लिया और आनंद पूर्वक जीवन व्यतीत करने लगा। विष्णु से विशेष विद्वेष था । सम्भवत: इसी की प्रतिक्रिया स्वरूप उसके पुत्र प्रहलाद में विष्णु के प्रति भक्ति की भावना जाग्रत हुई । एक बार हिरण्यकयप जब अपने पुत्र की शिक्षा के संबंध में जानने के लिए उसके गुरू के पास गया तप उस अपने पुत्र की भक्ति भावना का ज्ञान हुआ। उसने अपने पुत्र को ईश्वर का नाम लेने से मना किया परन्तु प्रहलाद को ईश्वर भजन से न रोक सका । 

Sunday, 8 September 2019

07:00

हरतालिका तीज व्रत और कथा

हरतालिका तीज व्रत और कथा

* हरतालिका तीज व्रत :-

भाद्रपद की शुक्ल तृतिया को हस्त नक्षत्र होता है । इस दिन भगवान् शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है । इस व्रत को कुमारी तथा सौभाग्यवती स्त्रियाँ ही करती है। इस व्रत को करने वाली स्त्रियाँ पार्वती के समान सुखपूर्वक पतिरमण करके स्वर्ग को जाती है
05:50

आमलकी एकादशी कथा ओर गोवर्धन कथा


आमलकी एकादशी कथा ओर गोवर्धन कथा

आमलकी एकादशी
(फाल्गुन शुक्ल एकादशी)

होलिका दगन से चार दिन पूर्व फाल्गुन के शुक्ल पक्ष की इस एकादशी का नाम आमलकी एकादशी है । इन दिनों आँवले के वृक्ष में भगवान् का निवास रहता है। इसलिए आँवले के वृक्ष के नीचे बैठकर भगवान् की पूजा करने और आंवले खाने और दान करने का विशेष महत्व है। इस दिन स्नानादि से निवृत होकर आंवले के वृक्ष का धूप, दीप, चंदन, रोली, पुष्प, अक्षत आदि से पूजन कर उसके नीचे ब्राह्मण भोजन कराना चाहिए ।