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Saturday, 19 January 2013

बुध गृह के बारे में जानिए (Learn about Mercury Home)

बुध गृह के बारे में जानिए

१. बुध ग्रह :-

बुधग्रह को नवग्रह मंडल में युवराज का पद प्राप्त है |

इसको चंद्रमा का पुत्र मन जाता है |

अंग्रेजी में इसको मरकरी कहा जाता है |

इस ग्रह का रंग हरा होता है |

यह एक बहुत ही सोम्य और सरल ग्रह है |

बारह राशियों में इसको मिथुन और कन्या राशी का आधिपत्य प्राप्त है |

बुधग्रह कुंडली में कन्या राशी में उच्च का और मीन राशी में नीच का फल देता है |

इसके अच्छे मित्रो में शनि और शुक्र का नाम आता है राहू को भी बुध का साथी माना जाता है | मगर बुध की शत्रुता चंद्रमा के साथ मानी गयी है |

सूर्य, मंगल,गुरु और को सम माना गया है |

इसको बुधि,वाणी और तर्क का ग्रह माना जाता है

इसके देवता गणपति है |

बुधग्रह के प्रभाव वाला जातक सुन्दर, सुशिल और बुद्धिमान होता है |

किर्याओ में बुध के प्रभाव वाला जातक पंडिताई का काम करता है और विद्धवान होता है गणित का मास्टर और पूर्व में किसी वस्तु अथवा बात का अनुमान या पूर्वाभास प्राप्त करने में माहिर होता है |

बुध प्रधान जातक व्यापारी होता है और वकालत, दलाली, सेल्समेनशिप आदि के पुरषार्थ के कामो में खूब कमाता है |

काल पुरुष में इसको वाणी का रूप कहा गया है |

२. बुधग्रह की उत्पत्ति :-

बुध कि उत्पत्ति का वर्णन पद्म ,मत्स्य ,मार्कंडेय ,विष्णु एवम ब्रह्म आदि अनेक पुराणों में मिलता है |जगतपिता ब्रह्मा जी के पुत्र प्रजापति अत्रि थे |अत्रि के पुत्र चंद्रमा हुए जिनको ब्रह्मा जी ने नक्षत्रों व औषधियों का अधिपति बनाया |चन्द्र ने राजसूय यज्ञ के अनुष्ठान से दुर्लभ ऐश्वर्य व सम्मान प्राप्त किया जिसे पा कर उसे मद हो गया |उसकी बुध्धि भ्रष्ट हो गयी और मदांध हो कर एक दिन अनितिपूर्वक देवगुरु बृहस्पति कि पत्नी तारा का अपहरण कर लिया|देवों तथा ऋषि मुनियों ने चन्द्र को समझाने का बहुत यत्न किया पर काम के वशीभूत होने के कारण उसने एक न सुनी |अंत में देवराज इंद्र ,रूद्र व देवसेना ने देवगुरु को न्याय दिलाने के लिए चन्द्र पर चढाई कर दी | बृहस्पति का विरोधी होने के कारण शुक्राचार्य ने दैत्य व दानवों सहित चन्द्र का पक्ष लिया |तारकमय नामक भीषण संग्राम हुआ |सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड इस भयानक देवासुर संग्राम से पीड़ित हो गया | ब्रह्मा जी ने मध्यस्थता करके दोनों पक्षों में सुलह करा दी तथा देवगुरु को उनकी पत्नी वापिस दिला दी |जिस समय तारा कि वापसी हुई उस समय वह गर्भवती थी |यह जान कर बृहस्पति बहुत कुपित हुए |उन्हों ने तारा को गर्भ त्याग6 करने का आदेश दिया |पति के आदेश कि पालना करते हुए तारा ने वह गर्भ एक तृण समूह में त्याग दिया |वह बालक अत्यंत सुंदर व तेजस्वी था | देवताओं के प्रश्न करने पर तारा ने उस बालक का पिता चंद्रमा को बताया | यह सुन कर चन्द्र ने उस बालक को अपना लिया और उसका नाम बुध रख दिया | ब्रह्मा जी ने बुध को नवग्रह मंडल में स्थान दिया |ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति कि बुध से शत्रुता का कारण इसी कथा में छुपा हुआ है |

३. बुध का विवाह :-

पुराणों के अनुसार वैवस्वत मनु के वंश में इल नाम का एक राजा हुआ | एक बार राजा इल शिकार के लिए एक वन में गए|उस वन में एक स्थान भगवान शंकर और पार्वती कि रति क्रीडा के लिए सुरक्षित था जिसे अम्बिका वन कहा जाता था | उस स्थान पर शिव ,कार्तिकेय ,गणेश व नंदी के सिवाय कोई अन्य पुरुष प्रवेश नहीं कर सकता था| किसी भी अन्य पुरुष के प्रवेश करने पर उसका स्त्री रूप हो जाना निश्चित था |राजा इल अनभिज्ञता वश उस आरक्षित स्थान में चले गए तथा स्त्री रूप में परिवर्तित हो गए |उसी स्थान पर किसी यक्षिणी से उन्हें उस शाप के बारे में ज्ञान हुआ | काल कि गति को स्वीकार कर उन्हों ने अपना नाम इला रख लिया तथा स्त्री रूप व स्वभाव अपना लिया |अम्बिका वन से बाहर आने पर इला का मिलन सोम पुत्र बुध से हुआ |दोनों एक दूसरे में आसक्त हो गए तथा विवाह बंधन में बंध गए |कालान्तर में इला के गर्भ से चन्द्र वंश कि वृध्धि करने वाला तेजस्वी पुत्र हुआ जिसका नाम पुरुरवा रखा गया | बाद में शिव व पार्वती कि आराधना करके इला ने अपने पूर्व पुरुषत्व कि प्राप्ति कर ली और फिर से इल बन कर अपने राज्य में चले गए |

४. पुराणों में बुध का स्वरूप और प्रकृति :-

मत्स्य पुराण के अनुसार बुध कनेर के पुष्प के अनुसार कान्ति वाला ,पीत रंग के पुष्प व वस्त्र धारण करने वाला तथा मनोहर रूप वाला है नारद पुराण के अनुसार बुध त्रिदोष युक्त,हास्य प्रिय,एवम,अनेकार्थी शब्दों का प्रयोग करने वाला है |

५. ज्योतिष शास्त्र में बुध का स्वरूप और प्रकृति :-

बृहत् पाराशर ,सारावली ,फलदीपिका आदि ग्रंथों के मतानुसार बुध सुन्दर ,हास्य प्रिय ,वात-पित्त-कफ प्रकृति का ,कार्य करने में चतुर,मधुर भाषी ,रजोगुणी,विद्वान, त्वचा व नस प्रधान शरीर वाला , कला कुशल ,सांवले रंग का तथा हरे रंग के वस्त्र धारण करने वाला है |

६. बुध ग्रह कि गति :-

गरुड़ व विष्णु पुराण के अनुसार बुध का रथ वायु एवम अग्नि से निर्मित है | उसमें वायु के समान वेग वाले अश्व जुते हैं जिनका रंग भूरा है |भागवत पुराण के अनुसार बुध कि स्थिति शुक्र से 2 लाख योजन ऊपर है |जब बुध सूर्य कि गति का उल्लंघन करता है तब पृथ्वी पर सूखा या अतिवृष्टि का योग होता है | स्थूल रूप से बुध एक राशि में 25 दिन तक संचार करता है |

७. वैज्ञानिक परिचय :-

रोमन मिथको के अनुसार बुध व्यापार, यात्रा और चोर्यकर्म का देवता , युनानी देवता हर्मीश का रोमन रूप , देवताओ का संदेशवाहक देवता है। इसे संदेशवाहक देवता का नाम इस कारण मिला क्योंकि यह ग्रह आकाश मे काफी तेजी से गमन करता है।बुध सौर मंडलका सूर्य से सबसे निकट स्थित और आकार मे सबसे छोटा ग्रह है। यह सूर्य की एक परिक्रमा करने मे 88 दिन लगाता है। यह लोहे और जस्ते का बना हुआ हैं। यह अपने परिक्रमा पथ पर २९ मील प्रति क्षण की गति से चक्कर लगाता हैं। बुध सूर्य के सबसे पास का ग्रह है और द्रव्यमान से आंठवे क्रमांक पर है। इसकी सूर्य से दूरी 46,000,000 किमी (perihelion ) से 70,000,000 किमी (aphelion) तक रहती है। जब बुध सूर्य के निकट होता है तब उसकी गति काफी धीमी होती है। बुध का कोई भी ज्ञात चन्द्रमा नही है। |बुध सामान्यतः नंगी आंखो से सूर्यास्त के बाद या सूर्योदय से ठीक पहले देखा जा सकता है।

८. ज्योतिष शास्त्र में बुध :-

ज्योतिष शास्त्र में मंगल को सौम्य ग्रह की श्रेणी में रखा गया है | राशि मंडल में इसे मिथुन और कन्या राशियों का स्वामित्व प्राप्त है | यह कन्या राशि में1-15 डिग्री उच्च का 16-20 मूल त्रिकोण का तथा शेष राशि में स्व गृही तथा कर्क में नीच का होता है | सूर्य व शुक्र से मैत्री ,मंगल गुरु व शनि से समता तथा चन्द्र से शत्रुता रखता है | | बुध अपने वार ,स्व नवांश,स्व द्रेष्काण,स्व तथा उच्च राशि , दिन एवम रात्रिकाल में ,उत्तर दिशा में बलवान होता है |

९. फल देने का समय :-

बुध अपना शुभाशुभ फल 32-36 वर्ष कि आयु में एवम अपनी दशाओं व गोचर में प्रदान करता है | कुमार अवस्था पर भी इस का अधिकार कहा गया है |

१०. बुध शान्ति के उपाय :-

प्रति बुधवार बुध देवता के संबंधित विशेष अर्चना करें अथवा बुध की पूजा किसी योग्य व्यक्ति से करवाकर शांति करवानी चाहिए |

अपने घर में तुलसी का पौधा अवश्य लगाना चाहिए तथा निरन्तर उसकी देखभाल करनी चाहिए। बुधवार के दिन तुलसी पत्र का सेवन करना चाहिए।

रोज श्रीगणेश का पूजन करें और प्रत्येक बुधवार को गणपति को मोदक अथवा बूंदी के लड्डू का भोग लगाये | और ॐ बुं बुधाय नमः के जाप करे नित्य २ माला करे |

बुध ख़राब होने पर हरे रंग से दूरी बनाए रखें। अपने आसपास कोई भी हरे रंग की वस्तु ना रखे। हरे रंग के कपडे न पहने और कमरे में हरा रंग न लगाये |

पांच बुधवार तक पांच कन्याओं का हरे वस्त्र दान करें।

गरीबों को बुध का दान हरे वस्त्र, मुंग और महिला को हरी चूडिया दान करें।

अपने घर में कंटीले पौधे, झाड़ियाँ एवं वृक्ष नहीं लगाने चाहिए। फलदार पौधे लगाने से बुध ग्रह की अनुकूलता बढ़ती